संगीत से सम्बंधित परिभाषाऐं - 1

१. संगीत - इस शब्द के अंतर्गत गायन, वादन तथा नृत्य इन तीनों कलाओं का समावेश होता है| ये कलाएं एक दूसरे पर आश्रित है| गायन इनमें श्रेष्ठ है क्योंकि गायन के अधीन वादन है और वादन के अधीन नृत्य|

 यह शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है: सं और गीत - सं का अर्थ है "उत्तम" और गीत का अर्थ है "गायन" इस प्रकार "उत्तम गायन" को संगीत कहते है| संगीत एक उत्कृष्ट ललित कला है जिसका मुख्य आधार नाद अथवा आवाज है| इसलिए संगीत कला को "नाद ब्रह्म" भी कहते है | 

२. भाव तथा शास्त्रीय संगीत - भारतीय संगीत को हम दो भागों में विभाजित कर सकते है -

२.१ भाव-संगीत (Light Music) - इस संगीत से जन-साधारण का खूब मनोरंजन होता है और इन गीतों को गाने और समझने के लिए विशेष ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती है| इन गीतों से लय, स्वर और काव्य गीतों का आनंद प्राप्त होता है| भाव संगीत में रागों की शुद्धता पर कम ध्यान दिया जाता है|   

२.२ शास्त्रीय संगीत (Classical Music) - जो संगीत स्वर, ताल, लय, आदि नियमों से बांधकर आकर्षक रीती से गया अथवा बजाया जाता है, वह शास्त्रीय संगीत कहलाता है| इस संगीत का नियमित शास्त्र होता है और क्योंकि इसे नियमित शास्त्र के अनुसार बजाते और गाते है, इसलिए इसे शास्त्रीय संगीत कहते है| इसे दो भागों में बांटा जा सकता है -

२.२.१ सैद्धांतिक (Theoretical) - इसके अंतर्गत संगीत का सम्पूर्ण शास्त्र आ जाते है| शास्त्रीय संगीत का यह अंग लिखित और अनेक नियमों से बंधा होने के कारण बहुत विस्तृत है|    

२.२.२ व्यावहारिक (Practical) - कला का मुख्य उद्देश्य उसकी अभिव्यक्ति है| शास्त्रीय संगीत के व्यावहारिक अंग में गायन, वादन और नृत्य के प्रकार, गायकी, शैली, घराने, ध्वनि का उतार -चढ़ाव, आलापचारी, तान आदि आते है| भारतीय संगीत के गायन और वादन का यह क्षेत्र बहुत बड़ा है और यह सैद्धांतिक अंग से अधिक प्रबल है|